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संजीव भदौरिया

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परिचय

प्रिय मित्रों !
       मेरा नाम संजीव भदौरिया है | मैं केंद्रीय विद्यालय में एक स्नातकोत्तर शिक्षक (संगणक विज्ञान) हूँ | मैंने इस सेवा में सन २००७ में आया | मैंने ये पद एक बहुत ही शुभ दिन यानि ५ सितम्बर को ग्रहण किया था | मेरा आरंभिक पाठ्यक्रम केंद्रीय विद्यालय मलिगाँव आसाम में हुआ था | वहाँ से मेरी नियुक्ति केंद्रीय विद्यालय नेरिस्ट में की गयी | वहाँ मैं ४ साल बिता कर लखनऊ के एक केंद्रीय विद्यालय में स्थानांतरित हो गया | केंद्रीय विद्याले के इन ५ वर्षों में मुझे बहुत कुछ सिखाया है |
       मेरे पिताजी का नाम श्री रमेश सिंह भदौरिया है तथा माता का नाम श्रीमती उर्मिला देवी है | मेरी पत्नी नीलू सिंह और बेटा मीत मेरे साथ ही रहते हैं | मेरे दादा जी श्री चन्द्रभान सिंह भदौरिया एक सेवा निवृत्त पुलिस उप निरीक्षक हैं  और दादी श्री मति सुशीला देवी एक गृहणी हैं | मेरा घर उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में है | और मैं इटावा जिले के एक गाँव अबारी का रहने वाला हूँ |
       मैं अपने जीवन में अपने छात्रों के लिए एक आदर्श प्रस्तुत करना चाहता हूँ | मेरे आदर्श स्वामी विवेकानंद हैं | अपने अध्यापन के समय मैं विषय के साथ साथ बच्चों को मूल्यपरक शिक्षा एवं नैतिक शिक्षा का ज्ञान देनाचाहता हूँ क्योंकि आजकल के शिक्षण में इन सबका पतन हो रहे है |
       इन सबके अलावा मुझे डांस देखने और करने का शौक है और थोड़ी रूचि हर तरह के संगीत को सुनने में है | मैंने के० वि० ईटानगर में अपने छात्रों को विद्यालय के कार्यक्रमों के लिए डांस भी सिखाया है जिन्हें आप youtube पर देख सकते हैं | मैंने अपने छात्रों के साथ टैगोर महोत्सव २०११ के लिए एक चलचित्र बनाया था जिसे केंद्रीय विद्यालय संगठन गुवाहाटी क्षेत्र में प्रथम और केंद्रीय विद्यालय संगठन अखिलभारतीय प्रतिस्पर्धा में द्वितीय स्थान प्राप्त हुआ | आप यह चलचित्र youtube पर देख सकते हैं | तथा बगल के स्तम्भ में भी आप उसका आनंद ले सकते हैं | के० वि० नेरिस्ट के उन छत्रों को के० वि० दिल्ली छावनी में पुरस्कृत किया गया |
       मैं हॉकी का अखिल भारतीय स्तर  का एवं राज्य स्तरीय खिलाड़ी हूँ | मैंने हॉकी खेलना स्नातक के बाद छोड़ दिया था | परन्तु अब कभी कभी अपने स्कूल में बच्चों के साथ खेल लिया करता हूँ आजकल मेरी रूचि कवितायें लिखने में बढ़ गयी है | आज कल के हालातों को देखकर कई कवितायें रची हैं | और मैं कोशिश कर रहा हूँ कि उन कविताओं को प्रकाशित करवा सकूं |
     यहाँ तक पहुचने के लिए बहुत संघर्ष करना पडा, जिसमे मेरे परिवार में मेरी माँ , मेरे दादाजी  मेरे चाचा , मेरे मामा ने बहुत मनोबल और सहयोग दिया | मेरी आज की सुद्रढ़ परिस्थिति के लिए मेरे मित्रों का साथ मैं कभी भूल नहीं पाऊंगा | मेरे बचपन के परम मित्रों में मो० ज़फर, राहुल तोमर, संघर्ष के समय के साथ देने वाले प्रकाश तोमर, देवेन्द्र बघेले और मुहीउद्दीन सर  और सेवाकालीन घनिष्ट मित्रों में एस ० के ० पाण्डेय, सुख्विन्द्र कुमार, ए० के० गिरी, अभय कुमार, के० एन० जयचंद्रन, वीनू मिश्रा, मो० राशिद, वी० के० मौर्या, विजय वर्मा, भूपेंद्र सिंह एवं निशा वर्मा  हैं | सेवाकालीन दोस्तों के जो मैंने नाम लिखे हैं इनसे मैं एक पल को भी दूर नहीं रहना चाहता पर के० वि० का ऐसा सिस्टम है की साथ रह नहीं सकते मैं इन सभी से मरते दम तक नाता रखूंगा और चाहूंगा की अगले जनम मैं भी मुझे यही दोस्त मिलें | एक परिवार जिसे मैं कभी भूल नहीं सकता वो है सतना के के० पी० सिंह तिवारी जी का परिवार, वो मेरे परिवार के जैसे ही हैं |
       अपनी इस जीवन काल में मैंने बस यही सीखा है कि अगर आप दूसरों के काम आएंगे तो दूसरे आपके की काम अवश्य आयेंगे | "अगर अच्छे मित्र चाहते हो तो पहले अच्छे मित्र बनो |"
       मैंने अपने जीवन में लड़ना, सहना, जूझना, झुकना, स्वीकारना, समझाना, समझना, हंसना, रोना, समर्पण करना सब सीखा है नहीं सीखा है तो बस गलत बात सहना | मैं अपने परिवार के साथ साथ अपने छात्रों के लिए समर्पित हूँ | और ये सभी पिताओं की तरह यह चाहता हूँ कि मेरा बेटा भी आगे चल कर एक नेक और सफल इंसान बने | और सभी छत्रों से ये अपील करना चाहता हूँ की वे अपनी माता-पिता और शिक्षकों के भरोसे को न तोड़ें |
       मेरे इस साईट को देखने के लिए आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद |
धन्यवाद